क्यों हो रहा है कृषि बिल का विरोध ? संसद के मानसून सत्र में मोदी सरकार पास कराना चाह रही 3 किसान बिल- Devbhoomi News
गुरुवार को लोकसभा में दो कृषि विधेयकों 'कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य यानि संवर्धन और सरलीकरण विधेयक 2020' और 'कृषक यनि सशक्तिकरण और संरक्षण कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक 2020' पर चर्चा हुई। इससे पहले आवश्यक वस्तु अध्यादेश, 2020 मंगलवार को पारित हो गया था। कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर ने लोकसभा में कहा कि नए विधेयक किसान विरोधी नहीं हैं और ये किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाएंगे। वहीं, विपक्षी दलों ने इन विधेयकों को छोटे किसानों के लिए नुकसानदायक करार देते हुए विधेयकों को संसद की स्थायी समिति के पास भेजने की मांग की थी। परंतु विपक्षी दलों के जबरदस्त विरोध के बावजूद दो कृषि विधेयक गुरुवार को लोकसभा में पारित हो गए।
इन विधेयकों के विरोध में शिरोमणि अकाली दल से मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने गुरुवार को मंत्री पद से इस्तीफा तक दे दिया। वहीं हरसिमरत कौर के इस्तीफे को पंजाब के सीएम ड्रामा बता रहे हैं इन विधेयकों को लेकर पहले भी कई किसान संगठन विरोध-प्रदर्शन कर चुके हैं। भाजपा इन विधेयकों को किसानों के लिए वरदान बता रही है तो कांग्रेस और सत्ता पर काबिज होने की कवायद में जुटी आम आदमी पार्टी ने कृषि विधेयकों के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है और आंदोलन कर रहे किसानों को समर्थन दे रही हैं उत्तराखंड के पुर्व मुख्यमंत्रि हरिश रावत भी इसके विरोध में २ घंटे का मौन व्रत रख इस आंदोलन का हिस्सा बने।
किसान यूं तो तीनों अध्यादेशों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन सबसे ज्यादा आपत्ति उन्हें पहले अध्यादेश के प्रावधानों से हैं। उनकी चिंताएं मुख्य रूप से व्यापार क्षेत्र, व्यापारी, विवादों का हल और बाजार शुल्क को लेकर हैं। किसानों ने आशंका जताई है कि जैसे ही ये विधेयक पारित होंगे, इससे न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) प्रणाली को खत्म करने का रास्ता साफ हो जाएगा और किसानों को बड़े पूंजीपतियों की दया पर छोड़ दिया जाएगा। हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश आदि राज्यों में किसान इन विधेयकों का विरोध कर रहे हैं। नए विधेयकों के मुताबिक अब व्यापारी मंडी से बाहर भी किसानों की फसल खरीद सकेंगे। पहले फसल की खरीद केवल मंडी में ही होती थी। केंद्र ने अब दाल, आलू, प्याज, अनाज और खाद्य तेल आदि को आवश्यक वस्तु नियम से बाहर कर इसकी स्टॉक सीमा समाप्त कर दी है। इसके अलावा केंद्र ने कॉन्ट्रैक्ट फॉर्मिंग यानि अनुबंध कृषि को बढ़ावा देने पर भी काम शुरू किया है। किसान संगठनों का आरोप है कि नए कानून से कृषि क्षेत्र भी पूंजीपतियों या कॉरपोरेट घरानों के हाथों में चला जाएगा और इसका नुकसान किसानों को ही होगा।
लोकसभा में विधेयकों की चर्चा के साथ ही विपक्ष ने इनका जोरदार विरोध किया था। केरल से राज्यसभा सांसद एनके प्रेमचंद्रन ने कहा कि इन विधेयकों को पारित करने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने कहा, 'सरकार से मेरा विनम्र आग्रह है कि बिलों को जांच के लिए स्थाई समिति को भेजा जाए, अन्यथा यह भारत में कृषक समुदाय के लिए एक और आपदा होगी।' वहीं, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पार्टी के सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि इससे पूरा कृषि उद्योग निजीकरण की ओर बढ़ेगा और राज्यों के राजस्व को भी नुकसान होगा।
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