कोरोना-बाजार और सरकार- Devbhoomi News
देहरादून । कोरोना को केंद्र सरकार ने एक वैश्विक महामारी घोषित करते हुए मार्च 2020 में लॉकडाउन घोषित किया था। इस लॉकडाउन से कोरोना पर कितना वार हुआ यह ऐसा सवाल है जिसका उत्तर न ही सरकार दे सकती है और न ही आम आदमी। इतना जरूर है कि उस समय लॉकडाउन की शायद कोई आवश्यकता नही थी क्योंकि मार्च माह में भारत के अंदर कोरोना संक्रमित व्यक्तियों की संख्या बहुत कम थी। ऐसे में एक लम्बा लॉकडाउन न ही कोरोना संक्रमण की चैन तोड पाया और न ही इसका कोई स्थायी हल निकला। उल्टा मजदूर, नौकरी पेशा, दैनिक कार्यो को कर अपने परिवार का भरण पोषण करने वाले लोग भूखमरी की कगार पर पहुंच गए। जो कैम्प उनकी मदद के लिए खुले गए थे वह कितनी मदद कर पाये यह वही लोग बता सकते हैं जो कैम्पो का संचालन कर रहे थे। कहने को तो भाजपा व कांग्रेस ने अपने चेहते नेताओ के नाम पर रसोईयां भी शुरू कर दी जहां से मजबूर लोगो को भोजन देने के दावे किए गए थे। जिस तरह पांचो अंगुलियां बराबर नही होती इसी तरह लॉकडाउन की समय अवधि के दौरान बेशक राजनीतिक पार्टियों के कार्यकर्ताओ ने जरूरतमंदो की मदद बेशक कम करते हुए प्रचार प्रसार ज्यादा किया लेकिन कोरोना...