शहर में हर जगह पसरी मलिन बस्तियां - Devbhoomi News

 

देहरादून। राज्य बनने से पहले नगर पालिका रहते हुए दून में 75 मलिन बस्तियां चिह्नित की गई थीं। राज्य गठन के बाद दून नगर निगम के दायरे में आ गया। वर्ष 2002 में मलिन बस्तियों की संख्या 102 चिह्नित हुई और वर्ष 2008-09 में हुए सर्वे में यह आंकड़ा 129 तक जा पहुंचा। तब से बस्तियों का चिह्नीकरण नहीं हुआ, लेकिन अगर गुजरे आठ साल का फौरी तौर पर आकलन करें तो यह आंकड़ा 150 तक पहुंच चुका है।
वोट बैंक की खातिर नेताओं ने नदी-नालों के किनारे जो मलिन बस्तियां शहर में जमाई हैं, उन पर जवाब कौन देगा। शहर में चौतरफा मलिन बस्तियां पसरी हुई हैं और दोनों ही दलों भाजपा-कांग्रेस के नेता वोट बैंक की खातिर इन पर राजनीति की रोटियां सेंकने का काम करते आए हैं।
मलिन बस्तियां-
रिस्पना और बिंदाल नदी के किनारे, रेसकोर्स रोड, चंदर रोड, नेमी रोड, प्रीतम रोड, मोहिनी रोड, पार्क रोड, इंदर रोड, परसोली वाला, बद्रीनाथ कॉलोनी, रिस्पना नदी, पथरियापीर, अधोईवाला, बृजलोक कॉलोनी, आर्यनगर, मद्रासी कॉलोनी, जवाहर कॉलोनी, श्रीदेव सुमननगर, संजय कॉलोनी, ब्रह्मपुरी, लक्खीबाग, नई बस्ती चुक्खूवाला, नालापानी रोड, काठबंगला, घास मंडी, भगत सिंह कॉलोनी, आर्यनगर बस्ती, राजीवनगर, दीपनगर, बॉडीगार्ड, ब्राह्मणवाला व ब्रह्मावाला खाला, राजपुर सोनिया बस्ती। 
मलिन बस्ती सुधार समिति की रिपोर्ट के निष्कर्ष

  • 37 फीसद बस्तियां नदी-नालों के किनारे बसी हुई हैं।
  • बस्तियों में 55 फीसद मकान पक्के, 29 फीसद आधे पक्के व 16 फीसद कच्चे मकान हैं।
  • 24 फीसद बस्तियों में शौचालय नहीं।
  • 41 फीसद जनसंख्या की मासिक आय तीन हजार रुपये व बाकी की इससे कम।
  • 38 फीसद लोग मजदूरी, 21 फीसद स्वरोजगार, 20 फीसद नौकरी करते हैं।
  • प्रतिव्यक्ति मासिक आय 4311 रुपये, जबकि खर्च 3907 रुपये है।
  • छह फीसद लोग साक्षर नहीं हैं।

 

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