विवादों को लेकर भी चर्चाओं में रहे चैंपियन -Devbhoomi News
देहरादून। खानपुर विधायक प्रणव सिंह चैंपियन का विवादों से पुराना नाता रहा है, लेकिन पिछले साल साल हुआ विवाद इतना गरमा गया था कि भाजपा ने विधायक पर कड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था। हालांकि, 13 महीने में ही आज उनकी घर वापसी हो गई है। दरअसल, पिछले साल जुलाई में उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें वो हाथ में शराब का गिलास लिए हुए तमंचे पर डिस्को करते हुए नजर आए थे। इसके साथ ही चैंपियन के नाम कई और विवाद भी जुड़े हुए हैं।
हरिद्वार जिले की खानपुर सीट से भाजपा विधायक हमेशा ही चर्चाओं में छाए रहे हैं। कभी अपनी दबंगई को लेकर तो कभी आपत्तिजनक शब्दों को लेकर विवादों में रहे। पिछले साल उनका एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें चैंपियन डांस करते नजर आ रहे थे। फिल्मी गाने पर डांस के दौरान वह हाथों में बंदूक लिए थे। साथ ही दो पिस्टल भी उनके हाथ में दिखाई दीं। बाद में एक पिस्टल मुंह में दबाकर भी वो डांस करते नजर आए। इस दौरान शराब पीते भी दिखाई दिए। डांस के दौरान चैंपियन ने अभद्र भाषा का भी प्रयोग किया। साथ ही, उत्तराखंड के बारे में आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग भी उन्होंने इस वीडियो में किया। इतना ही नहीं उनके साथ वीडियो में तीन-चार और लोग भी शामिल थे।
विधायक कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन और विवादों का चोली-दामन का साथ है। प्रदेश की पहली निर्वाचित कांग्रेस सरकार में मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी के शपथ ग्रहण से आज तक चैंपियन लगातार सुर्खियों में रहे हैं। कांग्रेस में रहते हुए उन्होंने पार्टी और सरकार को असहज रखा। अब भाजपा में आने के बाद भी विवाद उनके हमसाया की तरह साथ चलते रहे।
नारायण दत्त तिवारी के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान चैंपियन को पूरी उम्मीद थी कि निर्दलीय विधायक के रूप में कांग्रेस को समर्थन देने के कारण उन्हें मंत्री बनाया जाएगा। इसके लिए वह पूरी तैयारी के साथ आए थे। नाम न आने पर उन्होंने खासी नाराजगी जताई थी। इसके बाद वर्ष 2003 में चैंपियन पर लक्सर में मगरमच्छ के शिकार के आरोप लगे थे। इस पर वन विभाग ने मुकदमा भी दर्ज किया। हालांकि, इस पर आगे कोई कार्रवाई नहीं हुई।
जनवरी 2009 में चैंपियन पर मंगलौर में हवाई फायरिंग का मामला दर्ज हुआ, लेकिन कोई कारवाई नहीं हुई। वर्ष 2011 में चैंपियन पर तत्कालीन विधायक और मौजूदा विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल के समर्थकों ने मारपीट का मुकदमा दर्ज कराया गया था। इस पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसी वर्ष रुड़की के एक होटल के मालिक पर फायरिंग करने का भी आरोप लगा। इस मामले में मुकदमा तो दर्ज हुआ, लेकिन पुलिस ने आगे कार्रवाई नहीं की।
वर्ष 2015 में कांग्रेस सरकार के दौरान तत्कालीन कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत के देहरादून में यमुना कॉलोनी स्थित आवास पर एक पार्टी के दौरान उन पर हवाई फायरिंग के आरोप लगे थे। इसमें कांग्रेस के दो कार्यकर्ता घायल हो गए थे। हालांकि, तब प्रदेश में कांग्रेस सरकार होने के कारण यह मामला भी दब गया।
वर्ष 2016 में जब कांग्रेस सरकार में उठापठक चली तो चैंपियन बागी विधायकों के साथ रहे। वर्ष 2017 के चुनावों में भाजपा ने चैंपियन को टिकट दिया। चुनाव जीतने के बाद वह फिर विवादों में रहे। उन पर नामांकन के दौरान हथियारबंद समर्थकों को ले जाने के आरोप लगे।
इसी वर्ष भाजपा विधायक देशराज कर्णवाल से छिड़ी जुबानी जंग ने तो मर्यादाओं की सीमाएं लांघ दी। वहीं, दिल्ली में एक पत्रकार के साथ विवाद का उनका वीडियो भी वायरल हुआ था। इसे देखते हुए पार्टी ने उनकी प्राथमिक सदस्यता तीन माह के लिए निलंबित कर दी थी।
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