८-९ अगस्त --अगस्त क्रांति-- एक स्मरण

 

आज हम भले ही आजाद भारत में सांस ले रहे हैं, लेकिन इसके लिए हजारों राष्ट्रभक्त वीर- वीरांगनाओं ने अपना जीवन न्यौछावर किया है।
द्वितीय विश्व युद्ध में समर्थन लेने के बावज़ूद जबअंग्रेज़ भारत को स्वतंत्र करने को तैयार नहीं हुए तो राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी ने भारत छोड़ो आंदोलन के रूप में आज़ादी की अंतिम जंग का ऐलान कर दिया। जिससे ब्रितानिया हुक़ूमत में दहशत फैल गई। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने अंग्रेज़ों को देश से भगाने के लिए  '4 जुलाई, सन् 1942' . को एक प्रस्ताव पारित किया जिसमें कहा गया कि यदि अंग्रेज़ भारत नहीं छोड़ते हैं, तो उनके ख़िलाफ़ व्यापक स्तर पर नागरिक अवज्ञा आंदोलन चलाया जाएगा।


आंदोलन के लिए कांग्रेस को हालाँकि सभी दलों को एक झंडे तले लाने में सफलता नहीं मिली। इस आह्वान का मुस्लिम लीग,  हिन्दू महासभा और भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी ने विरोध किया, तथा हिन्दू महासभा औंर मुस्लिम लीग ने बंगाल सहित देश के अन्य हिस्सों में आंदोलन को हर हालत में कुचलने के लिए अंग्रेजों का साथ देने की योजना पर काम किया।  8 अगस्त 1942  को अखिल भारतीय कांग्रेस कार्यसमिति के बम्बई सत्र में भारत छोड़ो आंदोलन का प्रस्ताव पारित  होने से ब्रितानिया हुक़ूमत सतर्क हो गई। लिहाजा गांधीजी को अगले ही दिन  पुणे के आगा खान पैलेस में क़ैद कर दिया गया। अहमदनगर क़िले में जवाहरलाल नेहरू एवं सरदार वल्लभ भाई पटेल सहित कांग्रेस कार्यकारी समिति के सभी सदस्यों को गिरफ्तार  कर नजरबंद कर दिया गया। इसके बाद युवा नेत्री अरुणा आसफ अली ने 9 अगस्त को  मुम्बई के गवालिया टैंक मैदान में तिरंगा फहराकर कांग्रेस और गांधीजी के भारत छोड़ो आंदोलन का शंखनाद कर दिया।  इस आंदोलन से अंग्रेज़ बुरी तरह बौखला गए। उन्होंने सैकड़ों प्रदर्शनकारियों और निर्दोष लोगों को गोली से उड़ा दिया तथा एक लाख ( 1,00,000) से अधिक कांग्रेस कार्यकर्ताओं सहित स्वाधीनता सेनानियों को देशभर में गिरफ़्तार कर लिया गया। इसके बावज़ूद आंदोलन पूरे जोश के साथ चलता रहा, जबकि गिरफ़्तारियों की वजह से कांग्रेस का समूचा शीर्ष नेतृत्व लगभग तीन साल तक जेलों में बंद रहा। गांधी जी के इस निर्णायक करो या मरो आव्हान का परिणाम था, कि अग्रेजों की बेड़ियों में जकड़ा भारत 5 साल में आजाद भारत बन गया।


स्वतन्त्रता आन्दोलन में अपना र्स्वस्व न्यौछावर कर देने वाले वीर स्वतंत्रता संग्राम सेनानीयों को सादर नमन । आप लोगों की शहादत  देश को रास्ता दिखाती रहेंगी। कृतज्ञ राष्ट्र आपका ऋणी हैं।

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