उत्तराखण्ड की राजनीति में सक्रिय होते हरीश रावत - Devbhoomi News

 
 

फिर सक्रिय राजनीति में दिखाई देते हरीश रावत

देहरादून। उत्तराखण्ड के कद्दावर नेताओं में शामिल रहने वाले हरीश रावत एक बार फिर सक्रिय राजनीति में दिखायी देने लगे हैं। स्ट्रींग आॅपरेशन के कारण अपनी सत्ता को ताक पर रखने वाले और फिर अपने ही विधायकों की गद्दारी कि बावजूद सत्ता प्राप्त करने वाले हरीश रावत ने राजनीति में इतने उतार चढाव देखे कि यह माना जा रहा था कि वह सक्रिय राजनीति से हाथ जोड दंेगे। उत्तराखण्ड में कांग्रेस की गुटबाजियां भी इसी ओर इशारा कर रही थी लेकिन ऐसा नही हुआ। लॉकडाउन के दौरान सोशल मीडिया खासकर फेसबुक में सक्रिय रहने वाले उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत अब राजनीति की धरती पर दल बल के साथ दिखायी देने लगे हैं। बात चाहे राजभवन के घेराव की हो या फिर धरना प्रदर्शन की। अपने समर्थको के साथ वह आगे-आगे चलते दिखाई देते हैं। राजभवन घेराव के दौरान तो उनके ऊपर राजधानी दून में मुकदमा तक दर्ज हो गया है। कोरोना काल में बिना अनुमति जुलूस निकालना उन्हें व उनके समर्थको सहित कांगे्रसी नेताओं को भारी पडा लेकिन यह मुकदमे भी हरीश रावत को राजनीति में पीछे धकेलने में नाकाम रहे। हरीश रावत आज त्रिवेंद्र सरकार को घेरने का कोई मौका नही चूक रहे यह बात अलग है कि जब वह सूबे के मुखिया की कुर्सी पर बैठे हुए थे तो वह अपने वायदो को पूरा करने में आनाकानी करते हुए दिखायी देते थे लेकिन आज चाहते हैं कि सूबे की भाजपा सरकार अपने हर वायदे पर खरा उतरे। बेरोजगारो का मुद्दा  हो या फिर कोई और मुद्दा हर मुद्दे पर झंडा डंडा उठाने को तैयार रहने वाले हरीश रावत शायद वह वक्त भूल गए जब वह बेरोजगारो की मांग को लेकर लैंसडाउन चैक पर सो गए थे। वह उस दौर की बात थी जब स्ट्रींग आपरेशन के कारण उनके हाथ से सत्ता निकल गयी थी और राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा हुआ था लेकिन जैसे ही पुनः सत्ता उनके हाथो में आयी वह अपना बेरोजगारों की मांगो को पूरा करने वाला वायदा भूल गए जिसका परिणाम यह हुआ कि आज भी बेरोजगार सडक पर हैं और लॉकडाउन से पहले तक दून के धरना स्थल पर सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे थे। बात चाहे कोई भी हो लेकिन यह साफ है कि आज हरीश रावत सक्रिय राजनीति में विशेष दिलचस्पी ले रहे हैं। अभी हाल ही में कांग्रेस की वर्चुअल रैली के दौरान भी हरीश रावत ने सरकार की जमकर घेराबंदी की थी।हालांकि यह वर्चुअल रैली उन्हीं के राजनीतिक पृष्टिभूमि रही नैनीताल जनपद से शुरू हुयी है। जिला स्तरीय वर्चुअल कांफ्रेंस कार्यकर्ता संवाद की शुरूआत के पीछे कांगे्रस आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर चल रही है। वैसे कांग्रेस पार्टी सडक पर उतरकर सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद करना चाहती है। मगर कोरोना काल के कारण उसे यह मौका नही मिल पा रहा। शासन प्रशासन, पुलिस महकमा हर कोई वैश्विक महामारी कोरोना के कारण सतर्क व सजग है। यदि कोई भी व्यक्ति भारत सरकार के द्वारा जारी गाइड लाईन का उल्लंघन करता है तो उसके ऊपर कानून का चाबुक चलता है। शायद यही कारण है कि अब कांग्रेस पार्टी भी वर्चुअल कार्यक्रम में विश्वास जताने लगी है, या फिर यह भी कहा जा सकता है कि कांग्रेस भाजपा के पदचिन्हो पर चलकर अपने कार्यक्रमो को वर्चुअल कर रही है। पार्टी गाइड लाईन पर चलते हुए हरीश रावत भी वर्चुअल कार्यक्रम में विश्वास जता रहे हैं। जिस तरह से सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के दिग्गज नेता हरीश रावत सोशल मीडिया में सक्रिय हो रहे हैं वह कही न कही यह भी इशारा कर रहे हैं कि अभी वक्त उन्हीं का है। गुटबाजी करने वाले नेता चाहे कुछ भी कहे लेकिन आने वाला समय उन्हीं का होगा। चाहे फिर सूबे के मुखिया की कुर्सी ही क्यों न हो। उत्तराखंड के ताजा समाचार के  लिए  DevbhoomiNews.com पढ़िए 

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